चेहरों की उलझन – A Real Meaning of Love | Hindi Poetry | Peeyush Sharma | Stagetime


एक कविता थी, चेहरों की उलझन आप सुनियेगा, मुझे लगता है आपको मज़ा आएगा की तुम कहाँ मोहब्बत कर पाओगे ? तुम कहाँ मोहब्बत कर पाओगे ? तुम तो उलझे हो चेहरों में तुम कहाँ मोहब्बत कर पाओगे ? तुम तो उलझे हो चेहरों में , आख़िर तुमने ये कब जाना ?
उन चेहरों के दिल भी तो है | तुम कहाँ मोहब्बत कर पाओगे ? तुम कहाँ मोहब्बत कर पाओगे ?
तुम तो उलझे हो चेहरों में आख़िर तुमने ये कब जाना ?
उन चेहरों के दिल भी तो है |
दिल के अंदर है एहसास कई दिल के अंदर है एहसास कई
जज़्बात कई हैं , ख्वाब कई
एहसासों के भी चेहरे हैं एहसासों के भी चेहरे हैं वो और भी ज़्यादा गहरे हैं एहसासों के भी चेहरे हैं
वो और भी ज़्यादा गहरे हैं कुछ मासूम है छोटे बच्चों से वो सच्चे है, कई सच्चों से कुछ बूंद के जैसे नाज़ुक हैं
क्या तुमने छूकर के देखा है ? कुछ बूंद के जैसे नाज़ुक हैं क्या तुमने छूकर के देखा है ?
कुछ आकाश के जितने ऊंचे हैं
उस आकाश में उड़कर देखा है ? अरे! खुला छोड़ मन के पक्षी को अरे! खुला छोड़ मन के पक्षी को
जो बंद है अंदर पहरों में तुम कहाँ मोहब्बत कर पाओगे ?
तुम तो उलझे हो चेहरों में | तुम तो उलझे हो चेहरों में |

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