3 poetries | Hindi short poetry | Hindi Kavita | kavitayen


बढ़ कर छू लो आस्माँ तुम,
कि डर है किसका तुम्हें, काँटाें से घिरकर भी,
मुस्कराते हो जैसे तुम,
कि गर्व है तुम पर हमें..! वो शाखें भी पिंजर हुईं,
जिन पर कभी कोपलें फूटा करती थी
तो? बन जाओ कोई भागीरथ,
उतार लाओ स्वर्ग से गंगा, और हो जाओ स्वयंभू,
कि सिंचित हो धरती, जन्म दे स्वस्थ शाखों को,
और भर जाएं
कोपलों से संसार. ना है डर गिरने की,
ना ही है खबर तूफाँ की, आसमाँ है मंजिल मेरी,
क्योंकि,
ये है पहली उड़ान मेरी..!!!

1 thought on “3 poetries | Hindi short poetry | Hindi Kavita | kavitayen

  1. आपका वीडियो बहुत अच्छा है थैंक यू नाइस वीडियो

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