A Poem for Papa – Love you Dad! – Happy Father’s Day


यूँ तो थमा कर उंगली अपनी, चलना मुझे सिखाया पर भूल से गिरा जब भी, तो मुझे बहुत चिल्लाया डाँट की जगह आप प्यार से क्यूँ नहीं समझाते थे ? कड़क आवाज़ में हमेशा, क्यूँ मुझे डराते थे ? आखिर कब प्यार से मुस्कुराकर माँ की तरह गले लगाओगे क्या कभी ख़ुशी से आप भी मेरी पीठ थपथपाओगे ? यूँ ही मन मसोस कर मेरा बचपन गुजर गया पर अब जो आई समझ तब ये अहसास हुआ कैसे मुझे पता चले बिन, तूने मेरी हर मुसीबत अपने सर ली मुझे मज़बूत बनाने के लिये, डांट के पीछे मुस्कान भी अपनी छिपा ली मुसीबत से लड़ना, कभी न रुकना, तूने ही तो सिखाया तेरे कदमों के निशानो पर चलकर ही तो अपनी मंज़िल के रस्ते पर आया प्यार दिखाए बिन निभाने का पाठ तूने ही तो पढ़ाया पर आज एक बार ये प्यार दिखाना चाहता हूँ है तू मुझे सबसे अज़ीज़, ये बताना चाहता हूँ जो भी हूँ तुझ से हूँ, जो भी बनूंगा तुझ सा बनूंगा कर नहीं सकता कोई मुझे तुझ से जुदा, जो है तू ही तो है, मैं तो बस तेरा अक्स हूँ

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