Do Ajnabi | Faraz Hasan | The Social House Poetry | Whatashort

24 thoughts on “Do Ajnabi | Faraz Hasan | The Social House Poetry | Whatashort

  1. कुछ ज़ख्म ऐसे भी दिए उसने ने
    जिन्हें वक्त ने भी भरने से
    इनकार कर दिया

    वो शायद वक्त ही है
    जो तुझे मेरी कद्र करवा देगा
    जिसके साथ तू है वो तो तुझे वक्त भी नहीं देता होगा

    काश जागने की तरह
    हमारे पास सोने की भी कोई वजह होती
    एक अरसा हो गया रात को सोए हुए

    जो नहीं है मेरे पास
    वो नहीं है
    सिर्फ इतनी सी बात समझ में क्यों नहीं आती मुझे

    वो सुबह का ख्याल था जो सुबह आया
    रात का ख्याल रात को आता कहा है
    ख्याल ही तो है वो भी सो जाता है

    दिल तो बहुत करता है मेरा की रुक जाऊं
    मेरे हिस्से की ज़मीन भी तो मिले
    कि में ठहर जाऊं
    हर किसी की ज़मीन पर थोड़ी ना रुक जाऊं

    शायद ये वक्त भी उस गुज़रे हुए वक्त की तरह गुज़र जाएगा
    जो गुज़र गया

    काश हमें भी लोगो की तरह जीना आता
    काश ऐसा हो पाता

    मेरे हिस्से में सुकुन लिखना भूल गया
    या फिर लिखना ज़रूरी नहीं समझा

    अगर में इस जलन की जलन से जल कर ज़िन्दा बच गया तो
    क्या बदले में मुझे सुकून मिलेगा

    चलो हमें समझ में नहीं आता लेकिन आप को तो आता है
    वादा कर के तोड़ना
    आप को बहुत अच्छा आता है

    क्या फ़र्क रखा है उन्होंने मुझमें और दूसरो में
    चाहे में तारीफ़ करू या कोई और
    वो एक ही तरह से मुस्कुरा देते है

    एक हद तक ही इन्सान गलतफेमियो में रहता है
    देर से ही सही
    लेकिन फिर हक़ीक़त में भी रहने की आदत हो जाती है

    वो एक इन्सान जो मेरे कहने पर मेरे क़रीब रहा
    वहीं इन्सान दूसरों के कहने पर मुझ से दूर हो गया

    में अपने हिस्से की ज़मीन नहीं छोडूंगा
    तुम अपने हिस्से का आसमान अपने पास रखो

    सुनने को तो पूरी दुनिया सुन लेगी आप की बात
    हमें तलाश उसकी है
    जो बात को समझे

    वो रात का दर्द सुबह क्यों नहीं आता
    मुझसे डरता है या सूरज से जलता है

    तेरे क़रीब कोई और ना आए
    इसलिए हमने अपने साए तक को दूर कर दिया

    में अपने हिस्से की ज़मीन नहीं छोडूंगा
    तुम अपने हिस्से का आसमान अपने पास रखो

    अपनों पर भरोसा कर तो लु
    लेकिन पीठ का घाव
    आइने में दिखता है

    कभी फुर्सत मिले अपने आप से मिलने की
    तो आना ज़रूर
    तेरे अच्छे समाज में तेरे सुन्दर मकान के पीछे से
    बेवफ़ाई की एक गली गुजरती है
    जो सीधे मेरे आशियाने तक आती है

    इस बार अगर मिले तो रिश्ते के दायरों के पीछे नहीं
    सच और झूठ के आगे मिल
    जहा इंतज़ार को भी तेरा इंतज़ार हो

    ज़िन्दगी में एक ही ख्वाइश थी
    कि हम भी किसी की ख्वाइश बने
    लेकिन लोगों की ज़रूरत ज्यादा थी
    इसलिए हम लोगो की ज़रूरत बन गए

    रोते तो वो भी है हमें याद कर के
    फ़र्क सिर्फ़ इतना सा है
    हम अकेले में रोते है वो किसी के गले लग कर

    जब ज़रूरत नहीं होगी आपकी
    तो आज नहीं तो कल
    लोग आप को छोड़ कर चले ही जाएंगे

    मोहब्बत करना छोड़ दे
    या फ़िर शिकायत करना

    चाहत जिसकी थी बस वो ना मिला
    वरना ज़िन्दा हम भी थे और दुनिया भी हसीन थी

    चलो वादा करते
    ना आप को भूलेगे ना आप के दिए हुए दर्द को
    ना आइने को भूलेगे ना आइने में देखते हुए चेहरे को
    ख़ुश रहना हमारे जाने के बाद भी
    रूठ जाना बेवजह किसी से भी
    लेकिन नफ़रत मत करना अपने आप से
    उस वक्त जब पता चले _??????
    अब वादा को निभाएगा

    ख़ुश रहना आज के बाद हमेशा ….
    अब और वजह नहीं बनेंगे आप के दुखी होने की

    काश रात की तन्हाई में आप भी
    हमारी तरह अकेले होते
    तो हमारी जलन को समझ पाते
    अधेरे में दम तोड़ती मेरी ख्वाइशे पड़ी है
    किसी को कोई फ़र्क नहीं पड़ता
    क्युकी सब सो गए है

    बदनाम शायर की गली में एक मोहब्बत दम तोड रही है
    तू आएगी ज़रूर मुझसे मिलने
    ये में नहीं बोल रहा तेरी बेहती हुई आंखें बोल रही है

    पहले एक अधूरे इंसान को पूरा किया
    फिर बीच रास्ते में लाकर छोड़ दिया

    तोड़ दिया कांच से बने रिश्तों को तूने ऐसे तोड़ दिया
    जैसे रेगिस्तान में किसी इंसान को प्यासा छोड़ दिया

    हमारे जाने के बाद
    गले लगने का रिवाज़ बदल लेना
    देखने का अंदाज़ भी बदल लेना

    सुबह की धूप प्यारी लगती है
    तेरे जाने के बाद
    हर अपनी चीज़ पराई लगती है

    All poetry video on
    " The No MoRe Poetry "

    वो शायद वक्त ही है
    जो तुझे मेरी कद्र करवा देगा
    जिसके साथ तू है वो तो तुझे वक्त भी नहीं देता होगा

  2. तुम आओगे लौटकर मेरे पास इस आस मे
    मैंने हवाओं को रोक के रखा है….
    सपनों को किनारा कर तुझे देखने की प्यास मैं
    आँसूओ को पलको पर सजाके रखा है…..

  3. Tasalli se le lo talashi mere dil ki… Fir na kehna tafteesh me kami reh gayi! 😃 Beautiful! 👌😍

  4. Bhut feel se apni baate Kahi aapne …..aapki aankhe aapki aavaj ….bhut kuchh kh gyi ..sbdo pr dhyaan aaya to aur deep hogya ..great.

  5. he feel his shayari, the way he feels and say , it’s touched our heart ❣ amazing

  6. मुझे किसी ने बेवफा का नाम दिया,
    साथी ने जैसे जहर का जाम दिया,
    जो कभी कहा करते थे भुला मत देना,
    उन्होंने ही भूल जाने का पैग़ाम दिया…❤️❤️💖💖

  7. MOHABAT KE ASOOL KUCH OUR SAHIB
    2 MEIN SE 1 NIKALO TO 1 BACHTA HAI
    LIKIN MOHABAT MEIN 2 MEIN SE 1 NIKALO TO 1 BHI NHI BCHTA

  8. Alfaz jo lafz keh na sake

    Sitare sada chaand ke saath rehte hai,
    Par ve kabhi ek na ho sake,
    Main tumse bahut mohabbat karta tha karta hu aur hamesha karta rahunga,,
    Yahi wo alfaz the jo lafz keh na sake… Gaurav(PNGB)

  9. ~EK lafz mohabbat tha~ 💏
    ~Ek lafz judai tha~ 💔😩😞
    ~Ek vo le gya~ 😞
    ~Ek mujhe de gya~ 😞☹️

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