Hasya Kavita – यमराज से मुलाकात – Ist prize – Hindi Poem Recitation I Kids Lounge


एक दिन रास्ते में मुझे मिल गए यमराज,
बोले बेटा तेरे पापों का घड़ा भर गया आज मैं बोलै प्रभु, मैं तो जलेबी सा सीधा हूँ,क्यों मेरी शराफत पर ऊँगली उठा रहे हो? ज़रूर आपके कंप्यूटर में कोई वायरस है, जो मुझ पर ऐसा आरोप लगा रहे हो ध्यान से सुनिए, मेरी क्या मजबूरी है, आज कल जीने के लिए गलत काम करना भी ज़रूरी है यमराज बोले, बेटा इस तरह जी न दुखाओ
इंसान तो तुम पहले ही हो, अब गधों की तरह मत हिनहिनाओ पर ये तो तुम इंसानों का सिस्टम है, यह भी जान लो पर तुम्हारी बात सच्ची है, सो अपने प्राणों को छोड़ कर, कोई 3 वरदान मांग लो मैंने पहले दो वर मांगे, मेरे देश से गरीबी और बेरोज़गारी हटा दो यमराज बोले, बीटा यह तो असंभव है,
इसके बदले अपनी उम्र २० साल और बढ़वा लो मैंने आखिरी वर माँगा, प्रभु कम से कम भ्रष्टाचार ही मिटा दो इस पर बोले, अरे नादाँ, यह भी नहीं जानता,
कि विधि का विधान कौन मिटा सकता है जब मैं खुद यमराज होकर तुझे २० साल की रिश्वत दे रहा हूँ तो खुद ही सोच, यहाँ से भ्रष्टाचार से कौन मिटा सकता है पर याद रख, गर तुझमे सच्चाई होगी, तो तेरे उन्नति के रास्ते खुल जायेंगे तेरे सुख पेट्रोल के दामों की तरह बढ़ते, और दुःख, पानी के स्रोतों की तरह घटते जाएंगे

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