Hindi Hasya Kavita ‘Itihas ki pariksha’ (Inter school elocution) Hindi Poem recitation competition


आदरणीय अध्यापक गण एवं मेरे प्रिय साथियों सुप्रभात, मेरा नाम अक्षिता है, आज मैं आपके समक्ष एक हास्य रस कविता प्रस्तुत करने जा रही हूं जिसका शीर्षक है ‘इतिहास की परीक्षा’ हमारे देश में परीक्षाएं भी त्यौहार की तरह मनाई जाती हैं
इसमें सारा परिवार वयस्त हो जाता है तो आइये इस कविता के द्वारा एक विद्यार्थी के दुख को जानें जो इतिहास की परीक्षा देने जा रहा था इतिहास परीक्षा थी उस दिन, चिंता से हृदय धड़कता था थे बुरे शगुन घर से चलते ही,
बाँया हाथ फड़कता था तुम 20 मिनट हो लेट,
द्वार पर चपड़ासी ने बतलाया मैं मेल ट्रेन की तरह दौड़ता कमरे के भीतर आया परचा हाथों में पकड़ लिया,
आँखें मूंदी टुक घूम गया पढ़ते ही छाया अँधेरा,
चक्कर आया सिर घूम गया यह 100 नंबर का परचा है,
मुझे 2 की भी आस नहीं चाहे सारी दुनिया पलटे,
मैं हो सकता पास नहीं ओ प्रश्न पत्र लिखने वाले,
क्या मुँह लेकर उत्तर दें हम, तू लिख दे तेरी जो मर्जी,
ये परचा है या ऐटम बम मैने लिखा पानीपत का,
दूसरा युद्ध था सावन में जापान-जर्मनी बीच हुआ,
1857 में लिख दिया महात्मा बुद्ध,
महात्मा गांधी जी के चेले थे, गाँधी जी के संग बचपन में,
आँख मिचली खेले थे राणा प्रताप ने गौरी को,
केवल 10 बार हराया था अकबर ने हिंद महासागर,
अमरीका से मंगवाया था महमूद गजनवी उठते ही,
रोज 2 घंटे नाचता था औरंगजेब रंग में आकर,
औरों की जेब काटता था हो गए परीक्षक पागल,
मेरी कॉपी को देख देख बोले इन सब छात्रों में से
होनहार है यह ही एक औरों के परचे फैंक दिए,
मेरे सब उत्तर छाँट लिए जीरो नम्बर देकर,
बाकी सारे नम्बर काट लिए धन्यवाद
आपका दिन शुभ रहे

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