Hindi poem recitation competition ‘Kabhi Kabhi Khud Se Baat Karo’; I Kids Lounge


सुप्रभात। मेरा नाम अक्षिता है। आज मैं आपके समक्ष एक हिंदी कविता पेश करने जा रही हूँ, जिसका शीर्षक है ‘कभी कभी ख़ुद से बात करो’
इसके रचयिता श्री प्रदीप हैं कभी कभी ख़ुद से बात करो, कभी कभी ख़ुद से बोलो अपनी नज़र में तुम क्या हो, मन के तराज़ू पर तोलो। हरदम तुम बैठे ना रहो, शौहरत की इमारत में, कभी कभी ख़ुद को पेश करो, आत्मा की अदालत में। केवल अपनी कीर्ति ना देखो, कमियों को भी टटोलो कभी कभी ख़ुद से बात करो, कभी कभी ख़ुद से बोलो दुनिया कहती कीर्ति कमा कर, तुम हो बड़े सुखी, मगर तुम्हारे आडंबर से, हम हैं बड़े दुःखी। कभी तो अपने श्रव्य-भवन की बंद खिड़कियाँ खोलो कभी कभी ख़ुद से बात करो, कभी कभी ख़ुद से बोलो ओ नभ में उड़ने वालों, ज़रा धरती पर आओ
अपनी पुरानी सरल-सादगी को फिर से अपनाओ सन्तों की इस तपोभूमी पर, मत अभिमान में डोलो कभी कभी ख़ुद से बात करो, कभी कभी ख़ुद से बोलो अपनी नज़र में तुम क्या हो, मन के तराज़ू पर तोलो धन्यवाद, आपका दिन शुभ रहे

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