Hindi poem recitation competition with props- Hasya Kavita ‘Bazar ka ye haal hai’ Ist prize


सुप्रभात, मेरा नाम अक्षिता है। आज मैं आपके समक्ष एक हास्य कविता प्रस्तुत करने जा रही हूँ जिसका शीर्षक है ‘बाज़ार का हाल’। इसके रचयिता श्री शैल चतुर्वेदी हैं। बाज़ार का ये हाल है कि ग्राहक पीला और दुकानदार लाल है दूध वाला कहता है, दूध में पानी कयों है गाय से पूछो गाय कहेगी, पानी पी रही हूँ तो पानी ही दूंगी, दूध वाला मेरे प्राण ले रहा है, मैं तुम्हारे लूंगी। कोयले वाला कहता है, कोयले की दलाली में हाथ काले कर रहे हैं, बर्तन खाली ही सही, हमारी बदौलत चूल्हे तो जल रहे हैं। कपड़े वाला कहता है, जिस भाव में आया है उस भाव में कैसे दें? आपको 100% आदमी बनाने का आपसे 59% भी ना लें! धोबी कहता है कि धोबी के कहने पर राम ने सीता को छोड़ दिया, आप एक कमीज़ नही छोड़ सकते?! सौ रुप्पले की कमीज़ भट्ठी खा गई तो आप तिलमिला रहे हैं, यहाँ पर तो लोग ईमान को भट्ठी में झोंक कर सारे देश को खा रहे हैं। विद्यार्थी कहता है, आप हमसे 3 घंटे में 6 सवाल करने को कहते हैं, गुरु जी! ये वो देश है जहाँ एक हस्ताक्षर करने के लिये भी 24 घंटे लगते हैं। अंत में गौर फरमाईयेगा—- चोर कहता है, मुनाफाखोर मुनाफा कमा रहे हैं, तो हम भी तिजोरियां तोड़ कर, अधिकार और कर्तव्य को एक साथ निभा रहे हैं। किसी भी तिजोरी में झांक कर देखिये, आत्मा हिल जाएगी, किसी ना किसी कोने में पड़ी, लोकतंत्र की लाश मिल जाएगी। किसी ना किसी कोने में पड़ी, लोकतंत्र की लाश मिल जाएगी। धन्यवाद।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *