Hindi short poetry | Hindi kavita on life | Hindi poetry on yakshini


It is a lost and found story of a mauryan stone statue “Yakshini.” Please watch it till the end to know her story. थी सदियों से कैद मैं,
एक चुनार के चट्टान मेंं, मेरी खामोश आवाज की गूँज
सुन ली एक शिल्पकार ने और फिर चट्टान पर उसकी
जादुई उंगलियाँ थिरकने लगीं रुप-यौवन की बेमिसाल कृति बन,
मैं दिन-ब-दिन निखरने लगी कई आभूषण और अलंकारों से युक्त
मैं स्वयं पर इतराने लगी शूरवीर मौर्यों की धड़कन बन
सबके दिल में बसने लगी मेरी ग्रीवा त्रिवाली और कत्यावली पर
स्त्रियाँ ईर्ष्या करतीं थीं उनके इस रुप को देख
मैं मंद मंद मुस्कुराती थी शिल्पी ने मुझे कंधों, कमर और
घुटनाें से झुक विनीत होना सिखाया था दायीं भुजा में चौरी थमा
सेवा भाव का पाठ पढ़ाया था। सदियाँ गुजरी, साम्राज्य ढले,
कई उत्थान और पतन की गवाह बनी मैं, कई आक्रमण और उत्पातों की,
भुक्तभोगी भी बनी मैं। इसी उत्पात में किसी दिन,
गँवा बैठी मैं अपनी बाँयीं भुजा, शोक से विह्वल हो मैंने खुद को,
दे डाली निर्वासन की सजा। सो गई धरा पर, माँ का आँचल ओढ़े,
कैसे सह पाऊँगी उन नजरों का तिरस्कार? जिनमें कभी पाया था मैंने,
अत्यधिक प्रशंसा और अथाह प्यार। एक दिन माता ने नींद से जगाया मुझे,
कहा, पुत्री शोक न कर, जो नहीं है, उसका,
जो है, उस पर गर्व कर। बहुत खूबियाँ हैं तुझमें,
जिसे तूने नहीं पहचाना है, समय आया है उत्सव का,
तेरा गृह-निर्माण हुआ है। जा, फिर एक बार तू, जी ले अपने गौरव को,
सबकी आँखों का तारा बन, भूल जाना अपने अतीत को। आया है वो वक्त जब तू, शिल्पी के ऋण को चुकाएगी, उसकी अद्भूत कलाकृति को देख, दुनिया शीश नवाएगी। भीगी आँखों से माता ने, मुझे ऊपर लाया था,
दीदारगंज, गंगा के किनारे, गुलाम रसूल ने मुझे पहचाना था,
समादार ने, मुझे नए गृह तक पहुँचाया था। पटना संग्रहालय के भव्य कक्ष में,
एक सदी से अवस्थित हूँ मैं, सबके आकर्षण का केंद्र बनी,
अपनी धुरी को पहचानती हूँ मैं। भाव-विभोर हूँ मैं अपने,
इस नए जन्म-शती के उत्सव में, आभारी हूँ सबके प्यार और स्नेह की,
जो पाया मैंने हरेक कलाप्रेमियों में।

4 thoughts on “Hindi short poetry | Hindi kavita on life | Hindi poetry on yakshini

  1. बिहार की मोनालिसा कही जाने वाली "यक्षणी" के ऊपर अद्भुत कविता का निर्माण। Really!!! So Amazing 👌👌👍

  2. Murti ke seene me poetry latak rahi hai!!
    Achchha to ye hoti hai poetry.

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