Hindi short poetry | Hindi kavita on life | Short poems


Hamare dharohar humein kuch batana chahte hain…humein apne itihaas se bahut kuch seekhna hota hi….pesh karti hoon..ek choti si kavita. कई सदियाँ गुज़र कर गईं हैं मुझसे,
कई काल खण्डों ने तराशा है मुझे, और मैं,
स्वयं को समय के आईने में यूँ देखती हूँ, आरम्भ तो हूँ पर इति नहीं,
कृति तो हूँ पर कीर्ति नहीं, पत्थर तो हूँ पर पाषाण नहीं,
मूर्त्ति तो हूँ पर कहानी नहीं….!!

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