Mera Dost | Gantavya Vivek Punj | The Social House Poetry | Whatashort

23 thoughts on “Mera Dost | Gantavya Vivek Punj | The Social House Poetry | Whatashort

  1. Kya baat kahi h vivek bhai aapne…maan gye aapko…👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏

  2. कुछ ज़ख्म ऐसे भी दिए उसने ने
    जिन्हें वक्त ने भी भरने से
    इनकार कर दिया

    वो शायद वक्त ही है
    जो तुझे मेरी कद्र करवा देगा
    जिसके साथ तू है वो तो तुझे वक्त भी नहीं देता होगा

    काश जागने की तरह
    हमारे पास सोने की भी कोई वजह होती
    एक अरसा हो गया रात को सोए हुए

    जो नहीं है मेरे पास
    वो नहीं है
    सिर्फ इतनी सी बात समझ में क्यों नहीं आती मुझे

    वो सुबह का ख्याल था जो सुबह आया
    रात का ख्याल रात को आता कहा है
    ख्याल ही तो है वो भी सो जाता है

    दिल तो बहुत करता है मेरा की रुक जाऊं
    मेरे हिस्से की ज़मीन भी तो मिले
    कि में ठहर जाऊं
    हर किसी की ज़मीन पर थोड़ी ना रुक जाऊं

    शायद ये वक्त भी उस गुज़रे हुए वक्त की तरह गुज़र जाएगा
    जो गुज़र गया

    काश हमें भी लोगो की तरह जीना आता
    काश ऐसा हो पाता

    मेरे हिस्से में सुकुन लिखना भूल गया
    या फिर लिखना ज़रूरी नहीं समझा

    अगर में इस जलन की जलन से जल कर ज़िन्दा बच गया तो
    क्या बदले में मुझे सुकून मिलेगा

    चलो हमें समझ में नहीं आता लेकिन आप को तो आता है
    वादा कर के तोड़ना
    आप को बहुत अच्छा आता है

    क्या फ़र्क रखा है उन्होंने मुझमें और दूसरो में
    चाहे में तारीफ़ करू या कोई और
    वो एक ही तरह से मुस्कुरा देते है

    एक हद तक ही इन्सान गलतफेमियो में रहता है
    देर से ही सही
    लेकिन फिर हक़ीक़त में भी रहने की आदत हो जाती है

    वो एक इन्सान जो मेरे कहने पर मेरे क़रीब रहा
    वहीं इन्सान दूसरों के कहने पर मुझ से दूर हो गया

    में अपने हिस्से की ज़मीन नहीं छोडूंगा
    तुम अपने हिस्से का आसमान अपने पास रखो

    सुनने को तो पूरी दुनिया सुन लेगी आप की बात
    हमें तलाश उसकी है
    जो बात को समझे

    वो रात का दर्द सुबह क्यों नहीं आता
    मुझसे डरता है या सूरज से जलता है

    तेरे क़रीब कोई और ना आए
    इसलिए हमने अपने साए तक को दूर कर दिया

    में अपने हिस्से की ज़मीन नहीं छोडूंगा
    तुम अपने हिस्से का आसमान अपने पास रखो

    अपनों पर भरोसा कर तो लु
    लेकिन पीठ का घाव
    आइने में दिखता है

    कभी फुर्सत मिले अपने आप से मिलने की
    तो आना ज़रूर
    तेरे अच्छे समाज में तेरे सुन्दर मकान के पीछे से
    बेवफ़ाई की एक गली गुजरती है
    जो सीधे मेरे आशियाने तक आती है

    इस बार अगर मिले तो रिश्ते के दायरों के पीछे नहीं
    सच और झूठ के आगे मिल
    जहा इंतज़ार को भी तेरा इंतज़ार हो

    ज़िन्दगी में एक ही ख्वाइश थी
    कि हम भी किसी की ख्वाइश बने
    लेकिन लोगों की ज़रूरत ज्यादा थी
    इसलिए हम लोगो की ज़रूरत बन गए

    रोते तो वो भी है हमें याद कर के
    फ़र्क सिर्फ़ इतना सा है
    हम अकेले में रोते है वो किसी के गले लग कर

    जब ज़रूरत नहीं होगी आपकी
    तो आज नहीं तो कल
    लोग आप को छोड़ कर चले ही जाएंगे

    मोहब्बत करना छोड़ दे
    या फ़िर शिकायत करना

    चाहत जिसकी थी बस वो ना मिला
    वरना ज़िन्दा हम भी थे और दुनिया भी हसीन थी

    चलो वादा करते
    ना आप को भूलेगे ना आप के दिए हुए दर्द को
    ना आइने को भूलेगे ना आइने में देखते हुए चेहरे को
    ख़ुश रहना हमारे जाने के बाद भी
    रूठ जाना बेवजह किसी से भी
    लेकिन नफ़रत मत करना अपने आप से
    उस वक्त जब पता चले _??????
    अब वादा को निभाएगा

    ख़ुश रहना आज के बाद हमेशा ….
    अब और वजह नहीं बनेंगे आप के दुखी होने की

    काश रात की तन्हाई में आप भी
    हमारी तरह अकेले होते
    तो हमारी जलन को समझ पाते
    अधेरे में दम तोड़ती मेरी ख्वाइशे पड़ी है
    किसी को कोई फ़र्क नहीं पड़ता
    क्युकी सब सो गए है

    बदनाम शायर की गली में एक मोहब्बत दम तोड रही है
    तू आएगी ज़रूर मुझसे मिलने
    ये में नहीं बोल रहा तेरी बेहती हुई आंखें बोल रही है

    पहले एक अधूरे इंसान को पूरा किया
    फिर बीच रास्ते में लाकर छोड़ दिया

    तोड़ दिया कांच से बने रिश्तों को तूने ऐसे तोड़ दिया
    जैसे रेगिस्तान में किसी इंसान को प्यासा छोड़ दिया

    हमारे जाने के बाद
    गले लगने का रिवाज़ बदल लेना
    देखने का अंदाज़ भी बदल लेना

    सुबह की धूप प्यारी लगती है
    तेरे जाने के बाद
    हर अपनी चीज़ पराई लगती है

    All poetry video on
    " The No MoRe Poetry "

    वो शायद वक्त ही है
    जो तुझे मेरी कद्र करवा देगा
    जिसके साथ तू है वो तो तुझे वक्त भी नहीं देता होगा

    अगर तुम हसीन हो
    तो में भी जवान हूं

    अगर तुम मुहब्बत का समन्दर हो
    तो में भी ख्वाइशों का रेगिस्तान

    अगर तुम जवानी हो
    तो में उस जवानी की कहानी

    अगर तुम किसी की ज़िन्दगी हो
    तो मेरे लिए जीने का मकसद

    अगर तुम किसी का ख़्वाब हो या फिर बहुत खूबसूरत ख्वाब
    तो मेरे लिए मेरी हकीकत हो या फिर वो हक़ीक़त जिसे लोग खूबसूरत ख्वाब कहते है

    अगर तुम अपने आप को आईने में देखती हो
    तो में तुम्हे अपने आप में देखता हूं

    अगर तुम किसी और को प्यार करोगी
    तो में उस से नफ़रत करुगा

    अगर तुम मेरे साथ रहोगी
    तो में वक्त को रोक दुगा

  3. इतना घटिया ये था आज तक नहीं सुना और कुछ नहीं मिला तुझे

  4. तंग आ गई हुं इश दुनिया से मतलबी है सब यहा पे , कुछ दोस्त बनाये थे मेने जो जान थे मेरे पर बदले वोह भी बारी बारी ।

    जो प्यार था मेरा जिसे मे अपनी जिंदगी बना चुकी थी , वोह जिंदगी भी छोड कर चली गई ।

    सब ने एक एक कर के मेरा साथ छोडा , मेरा दिल तोड़ा ओर देकर चले गए मुझे दर्द ओर तकलीफ ।

    पर सिर्फ एक बात कहेना चाहती हु उन लोगो को , सक्रीया तुम लोगो का जिसने मेरा साथ छोडा , अगर तुम ना छोड़ते मेरा साथ तो इश दुनिया मे जिने का तरीका ना आता मुझे ।

    खुश हुं मे आज अपने परिवार के साथ आखिरकार परिवार के सिवा कोई अपना नही होता ।

    जिंदगी मे मेने सिर्फ इतना सिखा है मेरे दोस्त की कभी भी किसी पर इतना भरोसा ना करो की उस भरोसे की कोई कीमत ना हो ।

    जिओ अपनी जिंदगी अपने परिवार के साथ आखिरकार इन दोस्तो ओर प्यार मे क्या रखा है ।

  5. वाह भाई आज आपने इंसानियत की मिशाल दे दी 👏👏👏

  6. साले तू तो अपने बाप का भी नहीं है मै ये दावा के साथ कहता हूं

  7. Sab tu thik hai bada baat kar gaya .Kya wo vande matram bolta tha.main b bahut muslim dost ko bestie mana karta .4yrs tak saat tak tha per sab thik bolte hai muslim kabhi hindu ka nahi hosakta.esh liye main nafrat karta hu muslim say

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