Mother’s Day Special | Maa Se Door Rehta Hoon | Hindi Poetry by Abhinav Pratap – LIMEWIT Live


कोई भगवान कहता है कोई भगवान कहता है किसी ने अल्लाह लिखा कोई भगवान कहता है किसी ने अल्लाह लिखा मेरे लिए खुदा से भी ऊपर है वो मैंने बिस्मिल्लाह भी मां लिखा। चार लाइनें पेश करता हूँ यह उनके लिए है जो घर से बहुत दूर रहते हैं किसी भी वजह से तो… गौर फरमाइएगा कि मैं हर रोज मैं हर रोज दरवाजे पे तेरा इंतजार रखके जाता हूँ मैं हर रोज दरवाजे पे तेरा इंतजार रखके जाता हूँ तू आज आइ होगी लौट कर मां इस उम्मीद मे मैं जल्दी घर आता हूँ तू आज आइ होगी लौट कर मां इस उम्मीद मे मैं जल्दी घर आता हूँ तूझे ना पाकर मैं नहीं टूटता मेरी उम्मीद टूट जाती है तूझे ना पाकर मैं नहीं टूटता मेरी उम्मीद टूट जाती है मेरा हौंसला देख फिर उसी इंतजार को मैं अपने सिराहने सुलाता हूँ फिर उसी इंतजार को मैं अपने सिराहने सुलाता हूँ और कोई खास लगाव नहीं है मुझे अपने इन किराए की दीवारों से कोई खास लगाव नहीं है मुझे अपने इन किराए की दीवारों से जहाँ मैंने मां की तस्वीर लगाइ है उसी कमरे को घर बुलाता हूँ जहाँ मैंने मां की तस्वीर लगाइ है उसी कमरे को घर बुलाता हूँ और कोई लड़ता हुआ ना देख ले मुझे अपने आप से ही कभी कोई लड़ता हुआ ना देख ले मुझे अपने आप से ही कभी इसलिए कभी खुद छुप जाता हूँ तो कभी घर का आइना छुपाता हूँ हर रोज मैं दरवाजे पे तेरा इंतजार रख के जाता हूँ तू आज आइ होगी मां इस उम्मीद मे मैं जल्दी घर आता हूँ ये चार लाइनें हैं मैं उन लोगों को डेडिकेटेड करना चाहूंगा जिनके लिए त्योहार का मतलब दफ्तर की छुट्टी होती है और इससे ज्यादा और कुछ नहीं होता है हर दिन नोर्मल होता है बस एक दिन की छुट्टी बढ जाती है तो सुनना कि अब कोई त्यौहार मुझसे मिलने नहीं आता है मेरे किराए के घर में अब कोई त्यौहार मुझसे मिलने नहीं आता है मेरे किराए के घर में मेरी मां दिये सजाकर गांव में मेरा इंतज़ार करती है मेरी मां दिये सजाकर गांव में मेरा इंतज़ार करती है और तरक्की मिल जाती है इस शहर में मुझे हर रोज़ खुशी नहीं मिलती तरक्की मिल जाती है इस शहर में मुझे हर रोज़ खुशी नहीं मिलती मेरी पीठ मेरी पीठ बाप के उस शाबाशी वाले थपकी का इंतजार करती है अब कोई त्यौहार मुझसे मिलने नहीं आता है मेरी मां गांव में दिये सजाकर मेरा इंतज़ार करती है

49 thoughts on “Mother’s Day Special | Maa Se Door Rehta Hoon | Hindi Poetry by Abhinav Pratap – LIMEWIT Live

  1. I have seen alot of hindi poetries on mothers but this is the best. Har vo banda jo apni maa se door rehta hu vo relate kar sakta hai

  2. Good work on this hindi poetry. One of the best hindi poetry I've ever seen.👌👌

  3. Maa k liye nhi ye m apne abbu k liye likha h to jaroor sune….

    https://youtu.be/kmXHiX-kdYY

  4. Hats off man! Well written, well performed. I'll share this poetry on Mother with my friends for sure

  5. Many people can relate this!! His words are damn!! Great work @limewit. Waiting for more videos ahead 😍😄👍

  6. It was so so amazing….!! Got teary eyes…!! ❤️❤️❤️ Abhinav your every word has meaning and pain in it and it can be felt.✨
    Thankyou LimeWit for yet again amazing content.

  7. I had a good experience watching this poetry on mother 😂😂

  8. Really liked and connected with your poetry on mother. Thank you Abhinav

  9. Poetry on mother I loved this one. got teary eyes after watching this. 😔

  10. Best Poetry on Mothers on this #womensday . Sharing this one. 😍😍

  11. Here's a small tribute to the most important woman in our lives on this #womensday

  12. Thank you for this poetry man. Best thing to share on #womensday 😯

  13. One of the best content for #womensday . Best poetry on mothers.

  14. #womensday special poem from LIMEWIT. Good poetry on mothers Abhinav

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