POETRY: एक कविता हर मां के नाम | Dedicated to mom in Hindi


घुटनों से रेंगते रेंगते कब पैरों पर खड़ा हुआ घुटनों से रेंगते रेंगते , कब पैरों पर खड़ा हुआ तेरी ममता की छाया में जाने कब बढ़ा हुआ Kala Tika dudh malai
आज भी सब कुछ वैसा है Kala Tika dudh malai
आज भी सब कुछ वैसा है मैं ही मैं हूं हर जगह
प्यार यह तेरा कैसा है सीधा साधा भोला भाला मैं ही सबसे अच्छा हूं सीधा साधा भोला भाला मैं ही सबसे अच्छा हूं कितना भी में हो जाऊं बड़ा मां तेरे लिए मैं तेरा बच्चा हूं। तेरे लिए मैं तेरा बच्चा हूं।

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