Teachers’ Day Poem | Kese Hote Hain Teacher | Parag Pallav Singh


आप सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनायें देता हूँ मैं पराग पल्लव सिंह CSE 3rd year से आज आप लोगों से आपकी ही बात करुँगा और जैसा कि मैंने सर से सीखा है सर बैठे हुए हैं एक कविता के माध्यम से कि “कैसे होते हैं टीचर” … तो लिखा है कॉलेज वाली चाय में चीनी जैसे होते हैं टीचर महके फूल से जैसे खुशबू वैसे होते हैं टीचर रोज़ सुबह की गिनती करते दिख जाते हैं क्लासों में सेमेस्टर के रेगुलेटर जैसे होते हैं टीचर रोज़ सुबह की गिनती करते दिख जाते हैं क्लासों में सेमेस्टर के रेगुलेटर जैसे होते हैं टीचर कॉलेज में इवेंट होते हैं तो कैसे होते हैं कोई फेस्ट हो कॉलेज में तो जिम्मेदारी ये संभाले छोटी छोटी फाइलें लेकर उसी फेस्ट को कुंभ बनालें मस्ती करते सारे बच्चे पूरा कॉलेज सर पर लेकर सब पर नजर बनाए रहते ऐसे होते हैं टीचर अगली पंक्तियां पढ़ाई की बात पर इतना सिलिबस इतने महीने उनकी रोज़ की आदत बंक मारकर भगते बच्चे उनकी रोज़ की आफत है सबको बैठाना समझाना सबकुछ ही तो करते हैं बच्चों की दादी अम्मा के जैसे होते हैं टीचर। अब बात आती है नम्बरों की किसको कितने पर्चे देने किसको कितने नंबर देने कितने नंबर दो में देने कितने नंबर एक में देने इतनी सारी नाप तौल भी कितने प्यार से करते हैं। चलते फिरते कैलकुलेटर जैसे होते हैं टीचर। सेमेस्टर के रेगुलेटर जैसे होते हैं टीचर और आखिरी में अपना और अपने दोस्तों का experience शेयर करता हूँ सबकी नैया पार लगाएं कोई न बचके जाने पाएं जो डिटेन है उसकी ढंग से रेमेडियल ये लगवाएं अगर है कॉलेज एक सफर तो लेक्चर भी है एक सफर दोनों सफर के करता धरता जैसे होते हैं टीचर सेमेस्टर के रेगुलेटर जैसे होते हैं टीचर धन्यवाद

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